दिव्य मंत्र
संस्कृत में 'मन' का अर्थ है 'मन'
'त्र' का अर्थ है 'मुक्त करना'
यदि हमारा मन मंत्र जपकर भगवान का स्मरण करे, तो वह कष्टों से मुक्त हो जाएगा।
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप करके भगवान का स्मरण करें।
ॐ सच्चिदानंदाय नमो नमः!
ॐ सद्गुरुनाथाय नमो नमः!!
मंत्र का अर्थ :
"ॐ" शब्द ब्रह्मांड की ध्वनि है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है।
ॐ नमः शिवाय नमो नमः!
"नमः शिवाय" शब्द 'पंचमहाभूत' (पाँच तत्वों) की ध्वनि है —न — पृथ्वी
म — जल
शि — अग्नि
वा — वायु
य — आकाश
जब भी हम "ॐ नमः शिवाय" कहते हैं, पाँचों तत्वों की ऊर्जा अवशोषित होती है और हमारा मन-शरीर उन्नत होता है।
साथ ही,
"नमो नमः!" का अर्थ है — हम परमात्मा को बार-बार नमन करते हैं।
ॐ सच्चिदानंदाय नमो नमः!
सत् + चित् + आनंद = सच्चिदानंद
'सत्' — आत्मा
'चित्' — परमात्मा की चेतना
'आनंद' — जो आनंद हमारी आत्मा को परमात्मा की चेतना में निरंतर रहने से प्राप्त होता है।
ॐ सद्गुरुनाथाय नमो नमः!!
सद्गुरु कौन हैं?
परमात्मा जब मनुष्य अवतार लेकर पृथ्वी पर आते हैं — वे सद्गुरु हैं।
भगवान समय-समय पर अवतार पुरुष के रूप में पृथ्वी पर आते हैं। भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, बुद्ध, ईसा मसीह, आदि शंकर, श्री राघवेंद्र, शिरडी साईं बाबा, भगवान ज्ञानवल्लल को सद्गुरु कहा जाता है।
हम इन दिव्य अवतारों को नमन करते हैं।
चेतना ही ब्रह्म है
ब्रह्म ही सद्गुरु है
सद्गुरु ही भगवान है
ऐसा आदर्श अद्वितीय है।
यही हमारा आदर्श है!
